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अध्याय 9 लड़ाकू योद्धा

अगले दिन सलमा अपने बेटे समीर के साथ बाजार के लिए निकल गई, और हामिद और मुनीम जी लड़ाकू योद्धाओं से बात करने के लिए निकल गए।

दरअसल हामिद ने मुनीम जी को बता दिया था कि इस बार हरे आयाम में जाने की जो परीक्षा होने वाली है, उस परीक्षा के लिए समीर को निमंत्रण मिला है।

उसने मुनीम जी को बताया कि हमें समीर को परीक्षा के लिए तैयार करना होगा, हमें एक ऐसा लड़ाकू योद्धा ढूंढना है, जो उसके लायक हो।

मालिक यह सातवां लड़ाकू योद्धा था, जिसको आपने ना पसंद किया है, मुनीम जी ने कहा।

मुनीम जी यह सारे योद्धा केवल समीर को लड़ना सिखाने की बात कह रहे थे, हामिद ने अपने मन की दुविधा बताई।

तो आप कैसा लड़ाकू योद्धा चाहते हैं, मुनीम जी ने हामिद से पूछा।

हामिद ने उसे अपनी पूरी योजना बताइए, मुनीम जी आप तो सब कुछ जानते हैं, किसी भी बच्चे के अंदर 14 साल से पहले कोई भी आध्यात्मिक शक्ति उत्पन्न नहीं होती है, किसी भी बच्चे के 14 साल का हो जाने के बाद उसके अंदर आध्यात्मिक शक्ति का उदय होता है।

जिसके कारण वह लड़ाकू योद्धा बनने की राह पर निकलता है, जिसके अंदर कोई भी आध्यात्मिक शक्ति उत्पन्न नहीं होती है वह कभी लड़ाकू योद्धा नहीं बन पाते हैं जैसे आप और मैं।

जब बच्चा लड़ाकू योद्धा बनना शुरू करता है, तो उसका स्तर शून्य होता है, लेकिन 18 साल की उम्र तक आते-आते सभी बच्चे छठे तक पहुंच जाते हैं, कुछ बच्चे जो प्रतिभाशाली होते हैं वह सातवें स्तर से आठवें स्तर तक पहुंच जाते हैं।

अब आप ही बताइए कि यह लड़ाकू योद्धा 4 साल में किसी भी बच्चे को यह सब सीखाते हैं, हमारे पास 40 दिन का समय है, यह लड़ाकू योद्धा 4 साल मैं सिखाई जाने वाली चीज 40 दिन में तो सीखाने की कोशिश भी नहीं कर सकते हैं।

यह बस हमें बेवकूफ बनाकर हमसे सिक्के निकालना चाहते हैं, मैंने उनसे बातें करके केवल इतना जाना कि यह मेरे बेटे को लड़ाई के कुछ दाव सिखा देंगे और उसे उसकी किस्मत के भरोसे छोड़ देंगे।

हामिद की बात सुनकर मुनीम जी और ज्यादा दुविधा में पड़ गए, जब उनके कुछ समझ में नहीं आया, तो उन्होंने हामिद से पूछी मारा, तो मालिक आप क्या चाहते हैं।

हामिद ने मुनीम जी को बताया, कि उसे एक ऐसा लड़ाकू योद्धा चाहिए जो उसके बेटे को एक महीने में थोड़ा बहुत लड़ना सिखा दे, लेकिन उस लड़ाकू योद्धा का पूरा ध्यान मेरे बेटे को यह सीखाने पर हो कि वह हरे आयाम में बिना घायल हुए कैसे परीक्षा पास कर सकता है।

ठीक है मालिक आप जो कह रहे हैं वैसा ही करते हैं, मैं कुछ लोगों से पता लगाता हूं की शहर में और कौन-कौन से लड़ाकू योद्धा हैं जो बच्चों को प्रशिक्षण देते हैं, मुनीम जी ने कहा।

हामिद और मुनीम जी अभी कंचन जंगा शहर की गलियों से होते हुए, घोड़ा गाड़ी से अभी हवेली की तरफ जा रहे थे, तभी हामिद की नजर एक चौराहे पर भीख मांगते एक भिखारी पर पड़ी, उसे वह भिखारी कुछ जाना पहचाना सा लगा।

हामिद लगातार उसके बारे में सोचे जा रहा था और उसे गौर से देखे जा रहा था, हामिद के समझ में नहीं आ रहा था कि उसने इस भिखारी को कहां देखा है, पर उसे यह पूरा यकीन था कि उसने इस भिखारी को कहीं ना कहीं देखा है और वह उसको बहुत अच्छी तरह से जानता है।

अचानक से हामिद को याद आ गया कि उसने इस भिखारी को कहां देखा है उसने जल्दी से घोड़ा गाड़ी रूकवाई, घोड़ा गाड़ी सड़क के बगल से रुकने के बाद हामिद उतरकर पीछे उस भिखारी के पास जाने लगा।

हामिद को इस तरह घोड़ा गाड़ी से उतरकर जाता हुआ देख मुनीम जी भी उसके पीछे चल दिए।

हामिद उस भिखारी के पास पहुंचा और उससे बोला मैं तुम्हें जानता हूं, आज से 20 साल पहले जो हरे आयाम की परीक्षा हुई थी, उसमें तुमने अकेले होते हुए उस परीक्षा को पास किया था, उस समय तक किसी भी लड़ाकू योद्धा ने हरे आयाम की परीक्षा में ऐसा नहीं किया था।

तुम पहले ऐसे लड़ाकू योद्धा थे, जिसको किसी ने भी अपने समूह में शामिल नहीं किया था, उस समय सभी का मानना था, कि तुम हरे आयाम की परीक्षा पास नहीं कर पाओगे, लेकिन तुमने सबको गलत साबित कर दिया था, उसके बाद मेरा भी मानना था कि तुम बहुत आगे जाओगे।

लेकिन उसके बाद ऐसा क्या हो गया तुम्हारे साथ, तुम्हारा शरीर पूरा बेकार हो गया है, यह लड़ाई लड़ने के लायक नहीं रहा है, और तुम अब कंचन जंगा शहर की सड़कों पर भीख मांग रहे हो।

जाने दीजिए ना साहब, मैं वह सब भूल चुका हूं, उस भिखारी ने कहा।

हामिद ने अपनी जेब से दो चांदी के सिक्के निकाले और उसके कटोरे में डाल दिए।

वह भिखारी हामिद को देखता रह गया था, वह भिखारी पूरे महीने में एक चांदी का सिक्का भी नहीं कमा पता था, और हामिद ने उसे दो चांदी के सिक्के दे दिए थे।

उस भिखारी ने बताना शुरू किया, 10 साल पहले मैं एक उच्च लड़ाकू योद्धा बन गया था, इसके बाद मेरा एक बार एक ताकतवर परिवार के लड़के से झगड़ा हो गया।

लड़ाई के दौरान उस लड़के ने मुझ पर कई घातक हमले किए, पर मैंने उन सब हमलों को रोक लिया, मैंने लड़के को बहुत रोकने की कोशिश की लेकिन वह नहीं माना, लड़ाई में गलती से मुझसे उस पर एक घातक हमला हो गया, क्योंकि मेरे पास उसे रोकने का और कोई तरीका नहीं था।

उसके बाद लड़ाई शांत हो गई, उस लड़के के परिवार ने मुखिया से मेरी शिकायत कर दी, हम दोनों को मुखिया ने बुलाया, उस लड़के के परिवार ने सारा दोष मुझ पर डाल दिया।

लेकिन एक ताकतवर परिवार के सदस्य ने मेरी तरफ से गवाही दी, जिसके कारण मुखिया ने फैसला मेरी तरफ सुनाया और उस अमीर परिवार के लड़के को दंड भी दिया।

कुछ महीनो बाद जब मैं शहर से बाहर किसी काम से जा रहा था, तो कुछ हमलावरों ने मुझ पर हमला कर दिया, उन्होंने मेरी एक टांग तोड़ दी और मेरा एक हाथ तोड़ दिया, इसके अलावा उन्होंने मेरा डेंटीयन भी तोड़ दिया।

उस समय मेरे पास जितने भी सोने के सिक्के थे उन्होंने लूट लिए, और मुझे मरने के लिए जंगल में छोड़ दिया, वो तो वहां से एक घोड़ा गाड़ी निकल रही थी, उसमें बैठे लोगों ने मेरी जान बचाई और मुझे फिर से कंचन जंगा शहर में ले आए, यहां पर आकर मैंने देखा किसी ने मेरा पूरा घर जला दिया था, मेरी जो कुछ भी बचत थी वह उस घर के साथ जल गई, अब मेरे पास कुछ भी नहीं था, मैं तो पहले से ही एक अनाथ गरीब था।

यह सब सुनने के बाद हामिद ने उसके सामने एक प्रस्ताव रखा, इस बार होने जा रहे हरे आयाम के प्रशिक्षण में मेरा बेटा भाग लेने जा रहा है, मैंने अपने बेटे को लड़ाकू योद्धाओं की हर चीज से दूर रखा है जो लड़ाकू योद्धा बनने के प्रारंभ में सिखाई जाती है।

मैंने अपने बेटे को थोड़ी बहुत जानकारी दे रखी है पर उसे ज्यादा कुछ नहीं आता है, अगर मेरी मजबूरी ना होती तो मैं अपने बेटे को कभी भी हरे आयाम में नहीं भेजता ।

मुझे पता है तुम्हारे पास हरे आयाम में सुरक्षित रहने का एक तरीका है, अगर तुम मुझे वो तरीका बता दोगे, तो मैं तुम्हें 20 सोने के सिक्के दूंगा, यह तुम्हारे बाकी की जिंदगी के लिए काफी होंगे।

अगर मैं तुम्हें वो तरीका दे भी दूं, तो तुम्हारा बेटा इस परीक्षा को पास नहीं कर पाएगा, क्योंकि मैं एक महीने में उसे लड़ना नहीं सिखा सकता, जिससे वह आध्यात्मिक जानवरों का शिकार कर सके, उस भिखारी ने कहा।

हामिद ने अपना प्रस्ताव और बढ़ाते हुए कहा, अगर तुम मेरे बेटे को प्रशिक्षण देते हो और उसे अपना तरीका बताते हो, तो मैं तुम्हें 20 सोने के सिक्के के अलावा, अपनी हवेली में जिंदगी भर के लिए चौकीदारी पर रख लूंगा, तुम हवेली में ही नौकरों के साथ रह सकते हो, मैं अपने नौकरों के समान तुम्हें तनखा दूंगा ।

अब क्या फैसला लेगा भिखारी, क्या वह अब भी मना कर देगा, यह जानने के लिए सुनते रहिए इस कहानी को।

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