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अध्याय 10 लड़ाकू योद्धा की तलाश पूरी हुई

भिखारी ने एक पल के लिए सोचा फिर आगे हामिद से कहा, अगर मैं आपके बेटे को कुछ लड़ने के हमले सीखा भी देता हूं और अपना तरीका भी बता देता हुं, फिर भी आपके बेटे का हरे आयाम की प्रतियोगिता में सुरक्षित रहना संभव नहीं है।

क्योंकि इन सब के अलावा किसी भी बच्चे को अपने सहज ज्ञान और अपने ऊपर पूर्ण भरोसे की जरूरत होती है।

और आप अभी के लिए तो मुझे सब कुछ दे दोगे, लेकिन जब आपका बेटा हरे आयाम की परीक्षा में नाकाम होता है, या पास होने के बाद भी बहुत घायल होकर निकलता है, तो आपका पूरा गुस्सा मेरे ऊपर ही निकलेगा, आप अपने आदमियों से कहकर मेरे सारे सोने के सिक्के छीन लेंगे और मुझे नौकरी से भी निकाल देंगे, मैं फिर से इसी जगह पर आ जाऊंगा।

क्या तुम दरवेश परिवार के बारे में जानते हो, मुनीम जी ने आगे आते हुए उस भिखारी से पूछा।

भिखारी दरवेश परिवार के बारे में अपनी सारी जानकारी बताने लगा, दरवेश परिवार ताकतवर परिवारों में से एक परिवार था, दरवेश परिवार उन चुनिंदा परिवारों में से एक है, जिन्हें बहुत अच्छा परिवार कहा जा सकता है।

दरवेश परिवार ने आज तक किसी के साथ भी कुछ भी गलत नहीं किया है, पर कहते हैं ना अच्छे परिवारों के सब दुश्मन हो जाते हैं, दरवेश परिवार के साथ भी ऐसा ही हुआ, अब जहां तक मुझे पता है दरवेश परिवार का एक ही सदस्य जिंदा है।

जो की कंचन जंगा शहर को छोड़कर यहां से कुछ दूर समुद्र के किनारे पर रहता है, वह कभी लौटकर इस शहर में नहीं आया है।

यह सब सुनने के बाद हामिद के चेहरे पर मुस्कान आ गई, मुनीम जी भी मुस्कुराते हुए बोले, मेरे मालिक, दरवेश परिवार के वही सदस्य हैं जो इस शहर को छोड़कर चले गए थे ।

मैं यह काम करने के लिए तैयार हूं, बिना एक पल भी गवाई उस भिखारी ने कहा।

हामिद उस भिखारी को अपने साथ हवेली में ले आया।

वहीं दूसरी ओर कपड़ों के बाजार में.....

सलमा और समीर एक कपड़ों की दुकान से बाहर निकल रहे थे, उनके पीछे सलमान कुछ कपड़ों के थैली लेकर निकल रहा था।

सलमान यह सारे थैले घोड़ा गाड़ी में रखकर फिर से लौट कर आओ, सलमा ने कहा।

मां क्या हम अभी हवेली नहीं जा रहे हैं, समीर ने पूछा।

सलमा ने ना में अपना सर हिला दिया।

जैसे ही सलमान लौट के आया, सलमा ने उसे अपने पास आने का इशारा किया और धीरे से उसके कान में कहा, तुम हमें लड़ाकू योद्धाओं के कपड़ों की दुकान में ले चलो।

सलमान उन्हें एक दुकान के पास में ले आया, और सलमा से बोला, मालकिन यह दुकान हमारे शहर की सबसे मशहूर दुकान है, मुझे लगता है कि छोटे मालिक के लिए यहां पर सबसे अच्छी पोशाक मिलेगी।

यह सुनने के बाद समीर बोला, मां पर आपने मुझे पहले ही काफी पोशाक दिलवा दी है मुझे और पोशाक की जरूरत नहीं है।

यहां पर कुछ और खास चीज है, सलमा ने  समीर के गाल पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा।

जैसे ही वह सब दुकान के अंदर गए, तो एक लड़की सलमा के पास में आई और उससे बोली, मोहतरमा आपको क्या चाहिए, हमारे पास सभी प्रकार की पोशाक मिलती हैं।

मुझे अपने बेटे के लिए कुछ पोशाक खरीदनी है, सलमा ने उस दुकान वाली लड़की से कहा।

उस लड़की ने एक नजर समीर के ऊपर डाली और फिर सलमा से बोली, मोहतरमा आप मेरे पीछे आइये, हमारी दुकान की तीसरी मंजिल पर आपकी पसंद की पोशाक मिल जाएगी।

फिर वह लड़की उन्हें तीसरी मंजिल पर ले गई और फिर उन्हें एक तरफ ले जाते हुए बोली, मोहतरमा यहां आपके बेटे किस साइज की पोशाक रखी हुई है, उधर कपड़े बदलने का छोटा सा कमरा है,

यह सब बोलने के बाद वह दुकान वाली लड़की वहां से चली गई।

सलमा सभी कपड़ों को निकाल निकाल कर देखने लगी और उनमें से पोशाक पसंद करने लगी।

समीर धीरे से सलमान के पास में आया और उससे पूछा क्या तुम्हें पता है की मां मेरे लिए लड़ाकू योद्धाओं की पोशाक क्यों खरीद रही है।

नहीं छोटे मालिक मुझे नहीं पता है की मालकिन ऐसा क्यों कर रही हैं, सलमान ने जवाब दिया।

तभी सलमा एक पोशाक लेकर आई और समीर को देते हुए बोली, बेटा इस पोशाक को पहन कर मुझे दिखाओ इसमें तुम कैसे लगते हो।

मां इसकी क्या जरूरत है, समीर ने हल्का अफसोस में चेहरा बनाते हुए कहा।

अभी तुम मेरे लिए, मुझसे कुछ मत पूछो मैं जो कह रही हूं वही करो, सलमा ने बड़े प्यार से अपने बेटे से कहा ।

समीर ने सलमा के हाथ से पोशाक ली और कपड़े बदलने वाले कमरे में चला गया, सलमा ने दो और पोशाक निकाली और सलमान के हाथ में दे दी और वह कुर्सी पर बैठ गई।

तभी सलमा की निगाह उसी मंजिल के एक किनारे पर गई, वहां पर एक लड़की कपड़े बदलने वाले कमरे से निकल रही थी, वह लड़की बहुत ही सुंदर थी, और उसने जो लड़ाकू योद्धा की पोशाक पहनी थी वह उस पर काफी अच्छी लग रही थी।

क्या तुम इस लड़की को जानते हो, सलमा ने सलमान से पूछा।

यह लड़की कंचन जंगा शहर के मुखिया की सबसे चहीती पोती है, इसका नाम तमन्ना है, इस बार होने वाले हरे आयाम की प्रतियोगिता में यह भाग लेने वाली है, सलमान ने कहा।

यह बोलने के बाद अचानक सलमान का मुंह खुला क खुला रह गया, उसने एक नजर सलमा पर डाली और फिर एक नजर उस कमरे पर डाली जिस कमरे में समीर कपड़े बदल रहा था।

उसने मन में सोचा, मुझे लगता है कि इस बार छोटे मालिक को भी हरे आयाम की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए निमंत्रण मिला है।

इसलिए मालकिन छोटे मालिक को यहां पर लेकर आई हैं, और छोटे मालिक को इस हरे आयाम की प्रतियोगिता के बारे में कुछ भी नहीं पता है, वरना वह मुझसे वह सवाल नहीं पूछते।

तभी समीर कपड़े बदलने वाले कमरे से बाहर निकला, वह उस पोशाक में काफी अच्छा लग रहा था।

सलमा कुर्सी से खड़ी हुई और अपने बेटे के गाल को चूमते हुए बोली, मेरा बेटा इस पोशाक में कितना अच्छा लग रहा है, अब जल्दी से वापिस जाओ और इन दो पोशाकों को भी मुझे पहन कर दिखाओ ।

समीर ने सलमान के हाथ से उन दो पोशाकों को लिया, और कपड़े बदलने वाले कमरे में चला गया।

समीर के चले जाने के बाद दूसरी तरफ से तमन्ना उस कपड़े बदलने वाले कमरे से अपने पुराने कपड़े पहन कर और कुछ नई पोशाक लेकर पहली मंजिल पर चली गई।

अब तीसरी मंजिल पर वो तीनों रह गए थे, उसके बाद सलमा ने समीर को कई और सारी पोशाक दी।

फिर सलमा ने नीचे आकर कई पोशाकों का भुगतान किया और फिर वह तीनों उस  दुकान से बाहर आ गए।

इतनी सारी पोशाकों को देखकर सलमान को पूरा यकीन हो गया था की छोटे मालिक को हरे आयाम मैं जाने का निमंत्रण मिला है।

पर वह अपने छोटे मालिक को कुछ भी नहीं बता सकता था, क्योंकि जब उसके मालिक और मालकिन ने अपने बेटे को नहीं बताया है, तो वह समीर को सब कुछ बता कर, उन्हें गुस्सा नहीं करना चाहता था, इसलिए उसने चुप रहने का फैसला किया।

अब क्या होने वाला है समीर की जिंदगी में यह जानने के लिए सुनते रहिए इस कहानी को।

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