अगर आप किसी चीज से प्यार करते हैं, तो उसे पूरी तरह से प्यार करें, उसे संजोएं, कहें, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसे दिखाएं। जीवन सीमित और नाजुक है, और सिर्फ इसलिए कि एक दिन के लिए कुछ है, यह अगला नहीं हो सकता है। इसे कभी भी हल्के में न लें। जो कहना है कहो, फिर थोड़ा और बोलो। बहुत ज्यादा बोलो। बहुत ज्यादा दिखाओ। बहुत ज्यादा प्यार। सब कुछ अस्थायी है लेकिन प्यार। प्यार हम सब से अधिक है।
कहां से लाऊं इतना सब्र मैं ,
थोड़े से ही सही मिल क्यूं नहीं जाते तुम ।
दोस्त कठिन है यहां किसीको भी ,
अपनी पीड़ा समझाना ,
दर्द उठे तो , सुने पथ पर पांव बढ़ाना ,
चलते जाना ....
क्या कहा मुझे जानना है आंखों में छिपे राज़ को खोलना है ,
सुनो ........
जाने दो ,
इक पल में ही जीने वालों ज़िन्दगी ताउम्र....
इन्हे तो अनंत तक साथ मेरा निभाने दो ,
तुम जाओ भी इन्हें ज़रा - ज़रा सा और अपना बनाने दो ।
खूब कहा आपने ,
दर्द में लगते हो आज कल ,
बताओ गर कोई बात हो ,
सुनो ,
ये जो तुम्हारी आंखों को मेरी आंखों में देखने की चाहता है ,
इन सूखे अश्रुओं को गालों तक लाने की चाहत है ,
ज़रा संभालो ,
इन्हें अब ना कोई अपना बनाने की चाहत रखने वाले की चाहत है ।
पता मां ,
सब कहते हैं बदल सा गया मैं ,
ज़रा आप बताओ वही जो कहा करते हो उन सागर की लहरों से ,
कि ,
नदी मैं , हां नदी मैं , बहती चली , हां बहती चली , बिन कुछ कहे सागर सब सेहती चली ।
आओ आ भी जाओ पास मेरे थोड़ा और करीब ,
बसा लूं तुम्हें सांसों में ,
ए मेरे नसीब ।।
चलता रहुं यूं संग मैं तेरे ,
चल चलें ,
मेरी जाम ,
आसमां के परे ।
तेरी हंसी कुछ यूं गई असर मेरी जां बाकी रही ना ही कोई ख्वाहिश मेरी ,
जबसे मिली मेरी जां मैं क्या ही कहूं ।।।।
पल दो पल की जिंदगानी है मेरे दोस्त ,
चल चलें आ जी लें ज़रा खुल के भूल के सब ए मेरे दोस्त ।।
इन हसीन वादियों की तुम परी हो जाने जां ,
में मुसाफिर हूं सफर का ,
तुम मेरी मंजिल हो जाने जां ।।
ख्वाब सारे रूठे लागे , दिल भी सारे टूटे लागे ,
धुंधले धुंधले से आसमां में इन बादलों की घटा में ,
चांद भी छुप छुप चांदनी की राह तकता लागे ।।।
इश्क़ किया किसने क्या ही कहूं ,
उसने जिसने चाहा पाना ,
उसने जिसने चाहा खोना ,
उसने जिसने चाहा मनाना ,
उसने जिसने चाहा रूठना ,
उसने जिसने चाहा तन्हा दिल यूंही बिताना ख़यालो में ।।।
यही होना चाहिए ,
खुद ही तो सब बिगाड़ा है ,
गलती सुधारने की बजाए उसी बात को सोचना , कुछ भी हो जाए गलत गर ।।
सुनता सब की है करता अपने मन्न की ,
गुस्से को वजह से सब बन बनाया काम ठुकरा दिया ।।
कोई ज़रूरत नहीं ।।।।
क्यूं क्या हुआ ,
कुछ होना ज़रूरी है क्या ????????
मोहब्बत है ये काफी नहीं है क्या ,
जीने के लिए ,
क्यूं कुरेदना पिछली बातों को ,
आज और कल को खास लम्हों के साथ संजोते है ना ,
हर पल साथ में जीते हैं ना ।।।
१८-१-२०२२...
२२:४८