राँझना with सफर
रास्ता खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। हर पेड़, हर झाड़ी में जैसे किसी की मौजूदगी का अहसास था। उसके कदम और तेज़ हो गए, लेकिन जैसे-जैसे वह आगे बढ़ी, उसकी छाया अंधेरे में खोती जा रही थी। उसे ऐसा लगने लगा कि कोई कटी हुई, कांपती हुई आवाज़ उसके पास से निकल रही है—जैसे कोई उसे ही पुकार रहा हो।
Simpy_Kumari_8152 · Fantasy