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ch 4 जबर्दस्ती!

Hello every one 

अब तक : 

कुछ समय बाद हॉस्पिटल मे ओ टी रूम के बाहर बल्ब मे रेड लाइट जल रही थी और निहहा की पूरी फैमिली उस ओ टी रूम के बाहर गोल गोल घूमते हुए अपनी नजरों से उम्मीद भरी नजरों से उस ओ टी रूम को देखते हुए  चक्कर काट रही थी। 

वहाँ पर निहहा की पूरी फैमिली का हर मेंबर् मौजूद था बस थी नहीं तो वह थी निहहा क्यों की निहहा तो अभी भी उस मैरिज हॉल के अंदर अभी भी अपनी निकाह वाली जगह पर बैठी हुई थी उसको देख कर ऐसा लग रहा था जैसे वह अपने होश मे ही नहीं थी , वह एक बेजान पुतले की तरह बस उस जगह पर जमी हुई बैठी हुयी थी। 

बाकि निहहा के अलावा उस मैरिज होले मे निहहा के अलावा कोई भी इंसान मौजूद नहीं था  उस मैरिज होले मे निहहा बिलकुल अकेली थी। 

 वही कुछ दुरी पर एक आदमी वेटर के कपड़े पहन कर खड़ा हुआ था जो निहहा को अपनी गंदी नजरों से ऊपर से ले कर निचे तक देख रहा था और निहहा को लस्ट भरी नजरों से देखते हुए  अपने होठो पर अपनी जीभ फेर रहा था। 

 

तभी वह वेटर निहहा की तरफ बढ़ने लगा, निहहा की तरफ बढ़ते हुए उस आदमी के चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान थी और उस के चेहरे से ही उसकी चालाकी टपक रही थी। 

अब आगे : 

और फिर उसने निहहा को उसके कंधे से पकड़ कर हिलाया तो तब केहि जा कर निहहा को होश आया  और उसने फिर अपना सिर ऊपर उठा कर उस आदमी को देखा। 

निहहा के खुद को देखने पर उस आदमी ने तुरंत ही अपने फेस पर से वह कुटिल मुस्कान छुपा ली और वह गंभीर भाव के साथ एक उदासी भरी आवाज़ मे निहहा से बोला, " 

" मेम आप कब तक यहाँ पर इस तरह से अकेली बैठी रहेगी, अब यहाँ पर आपके अलावा कोई भी नहीं है, आप यहाँ पर बस अकेली बैठी हुई है, मेम आपकी अब शादी नहीं होने वाली है तो अब आपको यहाँ से जाना चाहिए, वैसे भी आपके फादर की हेल्थ ठीक नहीं है। " 

उस वेटर की बात सुन कर निहहा को ध्यान आ गया कैसे आमिर खान ने उस से शादी तोड़ दी, और कैसे फिर उसके पापा निचे जमीन पर गिर गए  , और फिर उन औरतों के ताने भी। 

एक एक कर के निहहा को वो सब ध्यान आ रहा था और अब तो रह रह कर निहहा के कानो मे, ये सब बाते ही सुनाई दे रही थी, और यह सब बाते निहहा को अब अपने कानो मे ऐसी लग रही थी, जैसे उसके कानो मे अभी कोई गर्म गर्म पिघलता हुआ शीशा डाल रहा हो।  

 इस वजह से निहहा ने एक जोर की चीख के साथ अपने कानो के ऊपर हाथ रख लिया और अपने हाथो से अपने कानो को पूरी ताकत के साथ ढक लिया,  ताकि उसके कानो मे ये अजीब अजीब सी दिल मे चुभने वाली बाते सुनाई दे रही थी, इसके साथ ही निहहा जोर जोर से बोल रही थी " नहीं नहीं, ऐसा नहीं हो सकता। " 

 तभी निहहा को बेजान सा अपने पापा को हॉस्पिटल ले कर जाना याद आ गया, इस वजह से निहहा एकदम से उस जगह पर ख़डी हो गई और उसने खुद मे ही बुदबूढ़ाते हुए कहा, "  नहीं मैं अपने पापा को कुछ नहीं होने दूगी वह बिलकुल ठीक हो जायेगे। " 

और फिर यह ही बोलते हुए निहहा उस मैरिज होले से बाहर निकल गई, अभी रात के 2 बज रहे थे। 

निहहा ने ये टाइम तो देखा ही नहीं की अभी इतनी रात हो रही है उसको तो बस अपने पापा की फ़िक्र हो रही थी जिस वजह से वह इतनी रात को उस मैरिज होल से बाहर चली गई थी उस वेटर के बोलने पर। 

वही ज़ब उस वेटर ने निया को उस मैरिज हॉल से बाहर जाते हुए देखा तो तब उसके फेस पर एक कुटिल मुस्कान आ गई, और उसने अपने मन मे सोचते हुए कहा, " हमारी दुल्हन रानी मैंने तुम्हे यहाँ पर कुछ भी इस लिए नहीं कहा की क्यों की यहाँ पर और भी बहुत से अच्छे लोग है और इस मैरिज हॉल मे. कमरे भी लगे हुए है सब को पता चाल जाता, जो भी कांड हम तुम्हारे साथ करते, इस मैरिज हॉल के अंदर, पर अब तुम खुद ही इस मैरिज हॉल से बाहर चली गई हो, तो अब तुम्हारे साथ बाहर कुछ भी हो, हमारे ऊपर कोई भी शक नहीं आएगा। " 

ये ही सब अपने मन मे बोलते हुए उस आदमी के फेस पर एक शैतानी मुस्कान आ गई थी। 

अभी उसे आदमी ने अपनी पैंट की पॉकेट से अपना फोन बाहर निकाल और किसी का नंबर डायल कर दिया,  एक दो रिंग के बाद ही किसी ने दूसरी तरफ से फोन उठा लिया , और उस दूसरी तरफ वाले इंसान ने कहा," क्या हुआ तुम मुझे इतनी रात को फोन क्यों कर रहे हो ?  " 

यह सवाल करने के तुरंत बाद ही उस इंसान के चेहरे पर एक लस्ट भारी स्माइल तर गई और उसने फिर एक लास्ट भारी स्माइल के साथ खुश होते हुए कहा," क्या तुम्हें  फिर से कोई नई नई आइटम मिली है क्या ?  नया माल मिला है क्या ? बोलो जल्दी" 

यह बात बोलते हुए उस इंसान को इतनी ज्यादा खुशी हो रही थी कि उसकी यह उत्सुकता उसके बात करने के तरीके में ही झलक रही थी। 

अपने साथी को इस तरीके से खुश होते हुए देख कर उस वेटर ने भी खुश होते हुए कहा,"हां अभी बस मैरिज हॉल से बाहर ही निकली है दुल्हन के कपड़ों में बेचारी अकेली इस सुनसान सी रात में ।" 

उस वेटर की बात सुन कर उसे फोन वाले आदमी ने खुश होते हुए कहा,"  ठीक है तू उसका पीछा कर और मैं बस अपने दोस्तों को ले कर वहां पर आता हूं । " 

उस फोन वाले आदमी की बात सुन कर उस वेटर ने कहा," ठीक है मैं उसका पीछा करता हूं तू जल्दी आजा  , फिर हम सब साथ में मज़े करेंगे । " 

यह बोल कर उसे बेटे ने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी और फिर उसे मैरिज हॉल से जल्दी-जल्दी बाहर निकल गया । 

वही दूसरी तरफ  निहहा तो बस उस सुनसान सी सड़क पर दौड़ती हुई जा रही थी जो हॉस्पिटल को जाती थी इतनी रात में निहहा को कोई ऑटो भी नहीं दिख रहा था , जिसमें बैठ कर वह जल्दी से हॉस्पिटल चली जाए । 

पर फिर भी वह बस जल्दी-जल्दी चलती ही जा रही थी लगभग आधे घंटे बाद उसके सामने एक  कार आ कर रुकी , कार को देख कर निया के मन में एक उम्मीद से जाग गई की वह इन लोगों से लिफ्ट ले कर जल्दी से हॉस्पिटल चली जाएगी। 

इस वजह से उसने उस कार के पास जा कर जोर-जोर से उसे कर के शीशे के ऊपर बजते हुए कहा," प्लीज मेरी हेल्प कर दो मुझे सिटी हॉस्पिटल जाना है । सिटी हॉस्पिटल में मेरे पापा एडमिट है , प्लीज मेरी हेल्प कर दो। " 

निहहा के इस तरीके से शीशे पर जोर-जोर से हाथों से थपथपाने की वजह से  उस कार का डोर खुल गया और उस कार के अंदर से एक आदमी की आवाज आई," आ जाओ अंदर हम तुम्हें हॉस्पिटल छोड़ देंगे , तुम्हारे पापा हॉस्पिटल में एडमिट है ना।" 

निहहा जैसे ही हां बोल कर , उस कार के अंदर बैठाने के लिए  थैंक यू बोलने वाली थी और उस कार के अंदर बैठने वाली थी तभी उसकी नजर कर के अंदर बैठे हुए लोगों पर चली गई,  अभी कार के अंदर चार पांच आदमी बैठे हुए थे । 

और उन आदमियों की नजरे जिस तरीके से निहहा को ऊपर से ले कर नीचे तक देख रही थी इस तरीके से निहहा को देखने से ही निहहा को उन आदमियों की नियत का अंदाजा हो गया था । 

जिस वजह से निहहा के फेस पर घबराहट वाले एक्सप्रेशन आ गए और उसने अपना पैर कार के अंदर बैठने के लिए नहीं रखा बल्कि और ज्यादा उस कार से दूर हो गई। 

और उसने घबराहते हुए उस आदमी से कहा, " नहीं मुझे अब जरूरत नहीं है, मैं खुद अब हॉस्पिटल चली जाऊगी थैंक यू, " 

 ज़ब उन आदमियों ने निहहा को इस तरह से कार मे बैठने के लिए मना करते हुए देखा तो तब उन मे से एक आदमी ने कार से बाहर आते हुए कहा, " ऐसे कैसे  मेडम जी आपको अब इस कार मे नहीं बैठना, और हमारे से लिफ्ट नहीं लेनी, देखो तो हम कितने ज्यादा शरीफ आदमी है  क्यों है ना दोस्तों। " 

उस आदमी की बात सुन कर बाकि के कार के अंदर बैठे हुए आदमियों ने भी उस कार से बाहर आते हुए कहा, " हाँ हाँ मैडम जी, हमारा दोस्त बिलकुल सच बोल रहा है। " 

तभी उन आदमियों मे से एक आदमी ने कहा, " हाँ हाँ मैडम जी हम तो बहुत शरीफ है हमारे से ज्यादा भला और कौन हो सकता है। " 

ये बात बोलते हुए उस आदमी के फेस पर अचानक से एक शैतानी मुस्कान आ गई और उसने फिर अचानक से निहहा का दुप्पटा अपने एक हाथ से पकड़ कर और निहहा के गले मे से खींच कर एक जोर के झटके के साथ हवा मे उड़ाते हुए दूर फेक दिया। 

आपको क्या लगता है आगे निहहा के साथ क्या होने वाला है क्या निहहा इन गंदे आदमियों से बच कर भाग जाएगी या आगे इस कहानी मे कुछ और ही होगा? 

पूरी कहानी जानने के लिए पढ़ते रहिये ये नॉवेल, " devil se pyar  " 

अब आगे की कहानी अगले भाग मे जारी रहेगी, 

तब तक के लिए alwuda

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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