रात के 11 गए थे। मै विष के घर के सामने खड़ा था। सिंपल सा घर था। हैप्पी फॅमिली वाला। मेरे साथ 6-7 लोग थे। ऐसा लग रहा था की मै कोई vip हूँ। वो लोग बाहर खड़े रहे। मै दरवाजे के पास गया। वहां पर एक बेल थी। मैंने बेल दबाई। कुछ देर बाद, अंदर से कुण्डी सरकने की आवाज आयी। दरवाजा खुल गया। मेरे सामने मेरी माँ खड़ी थी। मेरी असलि माँ। बस यहाँपे उसके बाल छोटे थे, चस्मा पहना था। मै बस उसकी ओर देखने लगा। वो मुझे कुछ अजीब से देखने लगी। मै चुप था।
काफ़ी देर वैसे ही देखने के बाद वो बोली,
"तूने बाल कब कट किये?"
माँ... माँ होती है। चाहे तुम किसी भी दुनिया मे चले जाओ।
उसकी बात सुनते ही मै अपनेआपको रोक नहीं पाया। मै मेरी माँ के गले लग गया। उसके गले लगतेही पता नहीं, एक राहत सी मिल गयी। माँ थोड़ी सी हैरान हो गयी। मेरे पिठ पे थपकी मारते हुए वो कहने लगी,
"अरे क्या हुआ? विष... सब ठीक तो है ना बेटा?"
मैंने कुछ जवाब नहीं दिया ना मुझे देने की जरुरत पड़ी।
*-*-*
मै डिनर टेबल पे बैठा था। माँ टेबल पे खाना-वाना सब रख रही थी। काफ़ी अलग-अलग डिशेस बनायीं थी उसने। खाना टेबलपे लगाते हुए वो बोलने लगी,
"अच्छा हुआ जो बाल कट करके आ गया। देख अब कैसा अच्छा लग रहा है।"
मै अपने मन ही मन हँसा।
वो आगे बोलने लगी,
"अच्छा सुन, एक ख़ुशी की बात है। guess what? मेरा फिरसे promotion पक्का हो चूका है। और हां, मेरे कंपनी के बॉस आ रहे है तो plz, उनके सामने कुछ उल्टा-सीधा मत बोल देना।"
मैंने अपना सर हां मे हिलाया और उससे पूछा,
"माँ, पर तुम जॉब क्यू कर रही हो? मै हूँ ना..."
"अरे दिन भर यहाँ घर पे कौन रहेगा!मुझे अच्छा लगता है", उसने कहा।
तभी बेल बजी। शायद बॉस आ गए। माँ झटसे दरवाजा खोलने चली गयी। एक पतलासा आदमी अंदर आया। ब्लेजर पहने हुए। माँ उन्हें टेबल की ओर लेके आयी। तभी मैंने बॉस को इम्प्रेस करने केलिए खड़े होके शेकहैंड केलिए हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा,
"Welcome sir. Nice to meet you."
तभी माँ ने हसते हुए मुझसे बोला,
"अरे ! पहली बार पापा से मिल रहे हो क्या? "
क्या! ये आदमी मेरा पापा! How is this possible? मै उस पतले आदमी को बस देखे जा रहा था।
वो आदमी मुझसे बोला,
"तुम ठीक तो हो ना बेटा?"
मै कुछ जवाब दे पाता तभी, फिर से बेल बजी। माँ दरवाजा खोलने चली गयी।
मेरी नज़रे इस पतले आदमी से हट नहीं रही थी। ये पतला आदमी इस दुनिया मे मेरा बाप है। क्या दूसरी दुनिया मे बाप भी अलग-अलग होते है क्या? पता नहीं, मेरे दिमाग़ मे बहुत कुछ चल रहा था।
माँ ने दरवाजा खोला और बॉस कों अंदर लेके आयी। मैंने बॉस को देखा और... मेरे पैरोंतले जमीन खिसक गयी। माँ का जो बॉस था, वो असल मे मेरा बाप था। मै मेरे पापा को... मतलब माँ के बॉस को बस देखे जा रहा था। फटी आँखों से।
उस पतले से आदमी मतलब मेरे इस दुनिया के बाप ने माँ के बॉस को मतलब मेरी दुनिया के बाप को शेकहैंड किया। ohh god, ये इतना confusing क्यू है?
"हेलो सर, nice to meet you?", पतले आदमी ने शेक हैंड करते हुए कहा।
"Thank you for inviting me.", बॉस ने कहा।
"आने मे कोई तकलीफ तो नहीं हुयी!", पतले आदमी ने पूछा।
"जी नहीं"
बॉस ने मेरी ओर देखा और अपना हाथ बढ़ाया। मै बस उन्हें देखे जा रहा था। तभी माँ ने शेकहैंड करने का इशारा किया और मै अपने खयालो से तनिक बाहर आके, बॉस से मतलब मेरे असलि पापा से शेकहैंड किया।
*-*-*
हम चारो डिनर कर रहे थे। बाते चल रही थी।
बॉस कहने लगा,
"कुछ भी कहो, लेकिन आप की बीवी का जवाब नहीं। हमारी कंपनी की तरक्की मे इनका काफ़ी बड़ा हाथ है।"
"आखिर बीवी किसकी है !", पतले आदमी ने हसते हुए कहा।
सब हसने लगे सिवाय मेरे। मै बस उन दोनों को देखे जा रहा था।
"आज जो इनको ये कामियाबी मिली है, ये इनकी मेहनत का फल है। इनकी मेहनत के सामने ये तो कुछ भी नहीं। मतलब इनके जैसा मेहनती हमारे पुरे ऑफिस मे कोई भी नहीं।"
तभी शरमाते हुए माँ बिच मे बोली, "सर plz, आप मुझे शर्मिंदा कर रहे हो। कंपनी की तरक्की यही तो मेरा गोल है। उसे पाने केलिए मैंने मेहनत की तो, इसमें इतनी क्या बड़ी बात है।"
तभी वो पतलासा आदमी बोला, "इसमें कोई झूठ नहीं की ये मेहनती नहीं है। कभी कभी तो ये ऑफिस के काम-काज से रात भर घर नहीं आती। पूरी रात ऑफिस मे रहती है।"
"तभी तो मै विदेश के काम केलिए सिर्फ इन्हे साथ मे ले जाता हूँ।", बॉस ने कहा।
मुझे कुछ कुछ समझ आने लगा।
बॉस उस पतले आदमी से आगे बोलने लगा, "अब next week हमारी एक मीटिंग है, विदेश मे और मै इनको 5 दिन केलिए साथ लेके जा रहा रहा हूँ। पता है क्यू..."
"I know sir. आखिर बीवी किसकी है। आप बेशक ले जाओ।", पतले आदमी ने कहा।
अब सारा मामला मेरी समझमे आ गया। इस दुनियामे मेरी माँ का और उसके बॉस का affair था। मै समझ नहीं पा रहा की इसपे आखिर कैसे रियेक्ट करू? मेरी माँ का मेरे बाप के साथ affair था। अब इसपे मै गुस्सा करू या हसु? ये मेरी कल्पना से भी परे था।
मै अपनी ही सोच मे गुम था तभी, माँ के बॉस ने मुझसे पूछा,
"आप कुछ टेंशन मे दिख रहे हो सर!"
"जी नहीं नहीं।", मैंने कहा।
"आपने लुक कब चेंज किया? वैसे ये वाला लुक काफ़ी अच्छा लग रहा है।", उसने कहा।
"थैंक यू पापा...सॉरी... थैंक यू सर।", मैंने उसे पापा बोल दिया।
अच्छी बात की वो किसी ने सुना नहीं। अब बचपन से पापा को पापा बोलते आ रहा हूँ। वो आदत अचानक से थोड़ी ही छूटेगी।
तभी वो पतलासा आदमी बॉस से बोला,
"हम सब एक दिन फ़िल्म देखने चलते है। आप, मै, ये और विष।"
"फ़िल्म? ", माँ ने कहा।
"अरे हाँ फ़िल्म। इस बार एक बहुत अच्छी फ़िल्म आयी है।"
तभी बॉस ने कहा, "जी माफ़ कीजिये पर मुझे ये फ़िल्म वगैरा पसंद नहीं है।"
"क्यू? ", पतले से आदमी ने पूछा।
"सब झूठसे भरी होती है फिल्मे। plz आप बुरा मत मानिये।"
"अरे नहीं नहीं। ये वाली फ़िल्म बहुत अच्छी है। इसमें जो हीरो होता है ना वो..."
"..अपने जैसी दिखने वाली दूसरी दुनिया मे चला जाता है!", मैंने बिच मे बोला।
"तुमने वो फ़िल्म कब देखि?", पतले आदमी ने पूछा।
"देखि नहीं बल्कि जी है।", मैंने हसीं के साथ कहा।
"मतलब? "
"कु... कुछ नहीं।"
तभी मेरी माँ ने पुछा, "ये दूसरी दुनिया जैसा सच मे कुछ होता है क्या? "
मैंने कहा, "हां। अपनी दुनिया जैसी दिखने वाली और भी दुनिया है। जहाँपे सब उल्टा होता है।"
तभी बॉस ने अपनी हलकी हसीं रोकते हुए कहा, "सॉरी पर... मै इस बात पे यकीन नहीं करता। ये सब बेतुखी बाते है।"
"Its real. बड़े बड़े साइंटिस्ट भी इस बात को मानते है।", मैंने कहा।
"मानने से क्या होता है?", बॉस ने कहा।
"मानने से क्या होता है मतलब? बड़े बड़े साइंटिस्ट ने इसपे थेओरी बनायीं है।", मैंने कहा।
"सॉरी सर, पर थेओरी किसी चीज का प्रूफ नहीं है। और रही बात मानने या न मानने की, तो मै इसपे तभी यकीन करूँगा, जब वो दुनिया मै अपने आंखोसे देखूंगा। plz, dont mind it."
मैंने बॉस की ओर देखा और मुझे याद आया की same यही बात चित हमारे बिच मे इससे पहले हुयी थी। बस उस वक्त मै पापा की बात बोल रहा था और पापा मेरी। मै खुद पे ही हसने लगा।
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1घंटा बीत गया।
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मै वापस जाने केलिए घर के बाहर आ गया। और मैंने देखा, वहापर एक भी आदमी नहीं खड़ा था। सभी आदमी पता नहीं, कहाँ गए थे। मै चौंक गया। तभी एक गाडी मेरे सामने आ गयी। उसमे रीना थी। उसने मेरी ओर देखा। शायद वो मुझे लेने आयी थी। क्या वो सच मे मुझे लेने आयी थी?
have a look to chapter 2(kya kab kaise) family dinner scene.
ये वाले फॅमिली डिनर को समझने केलिए chapter 2(क्या, कब, कैसे) के फॅमिली डिनरपे एक बार नजर डालिये।