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Chapter 05- सवाल-जवाब

मै सोफेपर अपना शरीर सिमटकर, हाथमे कॉफी का कप लेके, गर्दन निचे झुकाये बैठा था। वो आदमी, उसका नाम पीजे था। वो मेरे सामने इधरउधर चक्कर मार रहा था, हस रहा था। उसने मुझसे जो कुछ भी कहा, वो बात अभी भी मुझे डरा रही थी।

वो अपनेही मजेमें बकबक करें जा रहा था, "wow, तुम पैरेलल वर्ल्डसे हो। कूल। क्या बात है।"

उसने मेरी ओर देखके बोला, "अरे ख़ुश होनेके बजाय तुम दुखी क्यों हो रहे हो?"

मुझे अभी भी उसने कही बातपे यकीन नहीं हो रहा था। मैंने उससे पूछा, "तुम ये कैसे कह सकते हो की, मै दूसरी दुनियासे आया हूँ। ये सुननेमे कितना अजीब लगता है!"

"इससे ज्यादा अजीब तो न्यूज़मे दिखा रहे है। उससे अजीब क्या होगा!पुराने ज़माने मे हवामे उडानेवाली बात को भी अजीब मानते थे।"

मैंने मेरी बात को सच साबित करनेकेलिए उससे कहाँ, "ऐसा भी हो सकता है की, उन न्यूज़वालों को गलतफहमी हुयी होंगी। और मै शायद दूसरे शहरमे हूँ।"

"ऐसा नहीं हो सकता।", उसने आत्मविश्वाससे कहाँ।

"ऐसा नहीं सकता मतलब?", मैंने अपनि बातको प्रूफ करनेकेलिए कहने लगा, "तुम्हारे पास क्या सबूत है, की मै अपनी दुनियामे नहीं हूँ।"

अब हम दोनोंके बिचमे डिबेट चालू होनेवाला था।

"सबूत!", ऐसा कहके उसने मुझसे मेरा वॉलेट माँगा।

मैंने उसे मेरा वॉलेट दे दिया। उसने उसे ओपन करके कहाँ, "ये कागज कैसे है?"

उसने वॉलेट के अंदर रखे नोट को देखते हुए बोला। मैंने थोड़ा गुस्सेसे बोला, "वो कागज नहीं, पैसे है।"

"Exactly!", वो मेरे कार्ड्स को देखतेहुए कहने लगा, "तुम्हारा नाम अलग है। तुम एक ऐसी कंट्रीसे आये हो, जो कंट्री इस दुनियामे मौजूदही नहीं है।...i mean, हमारे दुनियामे तो नहीं है। और तुम्हारी करेंसी भी यहासे बिलकुल अलग है।"

मुझे वो कॉफी शॉप वाला किस्सा याद आ गया। वो कॉफी शॉप के मालिक के वो शब्द-"ये क्या रद्दी है। कौन अंग्रेज, कौन बापू।"

मैंने अपने सरको पकड़ते हुए बोला, "शायद ऐसा भी हो सकता है की, मै... मै पागल हो गया हूँ।"

"तुम्हारी हालत मै समझ सकता हूँ। ये असलियतसे परे जरूर लगता है पर, यही असलियत है।", उसने टेबलसे कप उठातेहुए कहा।

मुझे फिरभी इसपे यकीन करना मुश्किल हो रहा था। मेरे मनमे कई सारे सवाल घूम रहे थे। मैने सोफेसे खड़े होतेहुए कहाँ, "अगर ऐसा है तो, मै यहाँ पर कैसे आ पहुंचा? ना मैं कहींपर गया ना, ट्रेवल किया।"

"ट्रेवल करनेकेलिए ये कोई गावं या शहर नहीं है भाई। लाइट को भी यहाँतक आनेमे कई साल लगते है।", उसने कॉफ़ी का घूंट लेते हुए कहा।

"तो मै यहाँ पे कैसे आय पहुंचा?", मैंने हैरानीसे पूछा।

"एक ही चीज है, जो तुम्हे यहाँपे ला सकती है... वार्महोल।"

"ये क्या बेहूदी बाते कर रहे हो।", मेरा उसके ऊपर विश्वास करना मुश्किल हो रहा था।

उसने कॉफी का कप निचे रखा और कहा, "यही एक चीज है, जो किसीको भी यहाँसे वहां पंहुचा सकती है। शायद तुम्हारी दुनिया टेक्नोलॉजी के बारेमे काफ़ी पीछे है।"

मै पीजे की ओर बस देखे जा रहा था।

उसने मुझसे पूछा, "क्या तुम्हे इससे पहलेका कुछ याद है?"

मै किसी बच्चेकी तरह सबकुछ बताने लगा, "मै कल पार्टी को गया था। वहांपे शराब वगैरा पीकर वही एक घर के अंदर सो गया था। और उठनेके बाद ये सब...।", मै बोलते बोलते भावुक हो गया।

"बात नहीं बनी। क्या ऐसा कुछ हुआ था, जो बहुत अजीब लगता हो... मतलब unrealistic।"

"मै जब उस घरके अंदर गया, तब वहांपर काफ़ी कुछ चीज़े थी। मेरा पैर फिसल गया और मै वहां पे रखे शीशेके ऊपर... ", मैंने पीजे की ओर देखा, "हां हाँ, याद आ गया। और मै जैसेही शिशेके ऊपर गिरा, मुझे ऐसा लगा की मै शीशेके अंदर चला गया हूँ।"

उसने चुटकी बजानेकी कोशिश की पर, बजी नहीं। उसे इग्नोर करके उसने कहा, "yes! तुम वहीपर गिरे, जहांपर वार्महोल था।"

पीजे के हर जवाब पर मेरा सवाल खड़ा होने लगा।

मैंने हाथ घुमाते हुए कहाँ, "हेलो, वहांपर शीशेके अलावा कुछ नहीं था। वार्महोल होता तो मुझे दिखाई नहीं देता।"

"भाई, वार्महोल का कोई स्पेसिफिक आकार या रंग नहीं होता। कुछ वार्महोल नजर आते है, पर कुछ अदॄश्य भी होते है।", उसने बड़ी सांस लेते हुए कहा।

"या फिर ऐसा भी सकता है की, वो आइना ही दरवाजा हो।", मैंने कहा।

"शायद!"

"ओह्ह भगवान, पता नहीं, मै तुम्हारी बातोपे यकीन क्यू कर रहा हूँ!", मैंने अपनेआप पे गुस्सा करतेहुए बोला।

"Control bro. accept the truth।."

"एक बात बताओ। अगर मै दूसरी दुनिया से आया हूँ, तो यहाँपे सबकुछ मेरी दुनिया जैसा क्यू है?"

"इन फिल्मो ने सबका दिमाग़ ख़राब कर रखा है।", उसने खुदसे कहा और मुझसे कहने लगा, "पैरेलल वर्ल्ड मतलब साइंस फिक्शन वाली दुनिया नहीं होती। अपनी दुनिया का ही प्रतिरूप होता है। ये तो अच्छा हुआ, तुम अपनि दुनियासे मिलती-जुलती दुनियामे आ गए। वर्णा कुछ जगह पर इंसान अभी भी गुफाओ मे रहते है। कहींपर वस्त्र-भाषा कुछ नहीं है और कहींपर तो इंसान धरती छोड़कर स्पेस मे रहने चले गए होंगे। अगर ऐसी किसी दुनियामे फस गये होते तो, एक दिन भी नहीं टिकते वहांपे। समझा!"

मैंने मेरा डाउट क्लियर करनेकेलिए पूछा, "अगर ये मेरी दुनियाका प्रतिरूप है तो, ये मेरी दुनियासे इतना अलग क्यू है?"

पीजे ने मेरे ऊपर नकली गुस्सा करते हुए बोला, "अबे तुझे क्या मेरी बातोपे यकीन नहीं है !"

"अरे नहीं नहीं, मैंने तो बस ऐसे ही... "

"नहीं मतलब जब से तू आया है, तबसे मुझे झूठा साबित करनेपे तुला है। i'm bloody scientist man!"

"Sorry, sorry, मै तो बस जानकारी केलिए पूछ रहा था।", मैंने उसे संभालतेहुए बोला।

उसने अपने बालमे से हाथ फेरा, और स्टाइल मे अपना हाथ टेबल पे रखने केलिए गया पर, एक कटे वायरने उसे जोर का झटका दिया। वो टेबल से दूर हट गया। उसने मुझे जानकारी देते हुए कहा, "पैरेलल वर्ल्ड मे बस जन्म और मृत्यु सेम होते है। बाकि लाइफ सब अलग। लाइफस्टाइल, भाषा, कल्चर सबकुछ अलग। "

मै उसे गौरसे सुनने लगा। वो आगे कहने लगा,

"अगर तुम किसी दुनियामे जन्म लेते हो, तो उसके साथ साथ तुम बाकि की सभी दुनिया मे जन्म लेते हो। और अगर किसी दुनियामे तुम मर गए तो, बाकि की दुनियामे मौजूद तुम्हारे प्रतिरूप भी मर जायेंगे।"

मै फिरसे सोफे पे बैठ गया। निराश होके अपनेआप से कहने लगा, "पता नहीं, मै तुम पे यकीन कैसे कर रहा हूँ। मुझे तो मानो मै पागल हुआ हूँ, ऐसा लग रहा है। पता नहीं, मै कहाँ फस गया।"

पीजे ने टेबल के ऊपर से पिज़्ज़ा उठाया, "खाओगे?"

मै अपनेही टेंशन मे गुम था, "घरवाले परेशान हो रहे होंगे!... एक मिनट, उन्हें कॉल करके बताता हूँ", ऐसा कहके मैंने मेरा मोबाइल निकाला और तभी... मुझे मेरी हालत का एहसास हुआ।

शायद भगवानने सभीके हिस्सेकी तकलीफ मेरी झोली मे डाल दी थी।

मैंने पीजे की और देखा। उसने पिज़्ज़ा का एक बाईट ले लिया। उसने अपना मुँह ख़राब करके उस पिज़्ज़ा को सुंघा, और बेझिझक उसे खाने लगा। मै प्रॉब्लम मे था पर उसे कुछ फरक नहीं पड़ रहा था। मैंने गुस्से से उसे कहा,

"क्या तुम्हे अंदाजा भी है मेरी हालत का?"

"Hmmm", पिज़्ज़ा चबाते हुए वो बोला।

"तुम्हे पता भी है, मेरे दिल पे क्या बीत रही है ! मै एक ऐसी जगह पे फसा हूँ... मुझे खुद नहीं समझ आ रहा की, मै कैसे रियेक्ट करू?"

"मै तुम्हारी हालत समझ सकता हूँ", दांत के अंदर फसा हुआ निकालते हुए वो बोला।

"No, you cant understand!", मैंने गुस्से से बोला।

"I can", उसने बोला।

"No, you cant"

"but i can!", किसी तीसरे आदमी ने, एक कमरेसे बाहर आते हुए बोला।

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