सिया जब हॉस्पिटल से घर आती है तो देखती है राम्या किसी से फोन पे बात कर रही थी की सारा अरेंजमेंट एक दम परफेक्ट होना चाइए।
मुझे मेरी पार्टी में किसी भी तरह की कोई भी गड़बड़ नहीं चाइए ।
दूसरी तरफ साजिद राम्या की हर बात पे जी मैम बोल रहा था
और कह रहा था मैम सारा अरेंजमेंट एक दम परफेक्ट होगा आपको शिकायत का कोई मौका नहीं मिलेगा
राम्या जैसे फोन को रखती है तो सिया को जाते हुऐ पीछे से ही उससे कहती है सिया तुम्हारे डैड आते ही होंगे हमे आपस में साथ बैठ के डिनर करना चाइए और मुझे तुमसे कुछ बात करनी है
सिया सवालिया निगाहों से देखती है की जैसे की उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा की राम्या आखिर करना क्या चाहती है ओके मॉम मैं चेंज करके आती हूं।
राम्या सभी नामी लोगो की लिस्ट बना रही थी उसकी पार्टी में शहर के सभी लोगो को बुलाना चाइए जिससे उनके बिजनेस को और सक्सेस मिल सकती है ।
राम्या यह सोच ही रही थी की शेखर को आते देख बोली डार्लिंग तुम आ गए
मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी कल मैंने कल एक पार्टी रखी है और पार्टी में मैने शहर के सभी नामी लोगो को इनवाइट किया है मैने ठीक किया ना
इससे हम और पकड़ इस शहर और यहां के लोगो से जान पहचान और अपने नाम का रूतवा बिजनेस में भी हमे बहुत फायदा होने वाला है
शेखर ने राम्या से कहा की वो सब तो ठीक है पर इतने सारे इंसानों के बीच में तुम कैसे खुद को कंट्रोल कैसे करोगी
कही तुम खुद को कंट्रोल ना कर पाओ तो.....
राम्या इतने में बोली ये सब हमारे लिए कितना जरूरी है शेखर यह तुम भी जानते हो इसके लिए में इतना तो कर ही सकती हु इन इंसानों को इतना तो झेल ही सकती हु