1 Chapter N.1

Life me ye hota hai....

उगता सूरज कभी छुपता नहीं

मां का दुख किसी को दिखता नहीं

वह पी जाती है अपना दुख एक मुस्कान से

इसीलिए मां का रुतबा ऊंचा है जहान में।

. Next

वह पल भी कितना खूबसूरत होती है

जिस वक्त मेरी मां मेरे साथ होती है।

... Next....

बडे से बडा निशान चुआ

उठाया गोंद मे मा ने तब आसमामन छुआ

.... Next....

वो मेरी गुनाहों को धो देती है

मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।

...Next...

पापा के जैसा कोई नहीं जहान में

मां भी इनसे कम नहीं सम्मान में

इन दोनों का प्यार अगर मिल जाए जिसको

किसी की ताकत नहीं जो रोक ले मैदान में।

Next

शरारत करने वाले सब बड़े हो गए

घर का आंगन अधूरा सुनसान पड़ा है

ये जो आजकल के लौंडे महबूब की बाहों में चाँद सितारा ढूंढते हैं

जाकर देखो मां के आंचल में पूरा आसमान पड़ा है।

Next chapter