1 १. सुमति निवास

कहते है कि जो कष्ठी इश्क के शहेर में सवार चलती है उसका कोई किनारा नहीं होता । वफा के तलाश में सारी ज़िन्दगी गुज़ार देने पर भी ये मोहब्बत कभी मुकम्मल नहीं होती।

"अगर ईश्क किया ही है तो बेइंतेहा करो । अगर मेरे इश्क से रब राज़ी होजाए फिर किस्मत तो क्या क़यामत भी कभी दो मोहब्बत करने वाले दिल को जुड़ा नही कर सकती"।

कूच ऐसे ही हैं - कशिश और मुस्कान कि प्रेम कहानी । कशिश टोह मुस्कान के पड़ोस में रहता है । और मुस्कान सुमति जी और सुधीर नारायण मिश्रा की एक लौती सुपुत्री थी। सुमति जी तो सर्वगुण समर्पण । उनके हाथ के बने हुए अचार पापड़ और सुधहर मिश्रा का मिष्ठान बंधर के जेलाबी पूरे अग्रा में प्रसिद्ध है। मौसम एक दम सुहाना , बदल भी खुशिय मनारेजी है शरद ऋतु कर। बारिश की गोल गोल बूंदें किड़की के पास रखा हुआ एक गुलाब का पौधे पर गिर कर उस लाल गुलाब की शोभा और भी बड़ा दिया है। नीचे आंगन भी पूरा साफ़ हुए चुका था । ये नज़ारा देख के मुस्कान मन ही मन में मुस्कुरा कर अपनी मां के तलाश में पूरा घर सर पर उता लेती हैं। " मा कहा हो तुम मा ज़रा इधर तो आना" देखो कों आया है हमारे साथ रहने सुमति निवास मै।

सुमति निवास की आन बान और शान टोह मुस्कान की हसी और उसके गुंगरू के शोर । सुमति जी और उसके श्रीमान सुधीर ही की खट्टे मिते नोकझोक । जो यादों कि पूरी बारात थी। "मुस्कान। बेटा इतनी सुबह बारिश म कौन आएगा?". मुस्कान अपनी मां के गले लग कर कहती है-" में टोह गुलाब की बात कर रही हूं। और तुम रासोई घर में रोटी बना रही हैं। देखो टोह ज़रा ये लाल गुलाब बारिश में कैसे खिल रहा है। " सुमति जी भी प्रकृति प्रेमिका थी। इसलिए उस गुलाब को देखने हेतु भागी भागी चले जाती है। सुधीर जी आंगान में बैठ कर अपने रेडियो पर प्राचीन काल के कहानियां सुन रहे हैं। अखबार वाला भी उनके घर में कहानियां सुन कर उनसे सवाल करता है " मिश्रा जी आपको यह कहानियां क्यों इतनी अच्छी लगती है की आप इनको छोड़ के फिल्मी गाने सुनना नही चाहते है?"।

अखबार बाबू तुम नहीं जानते इस बेनाम प्रेम को । अपना घम दूर करने केलिए यही एक मार्ग मिला । आखिर इस घर को बसाने में बहुत पापड़ बेले है। फिर भी मेरे स्वर्गीय पिता जी कमल मिश्रा यह घर को उनके बहू मतलब की मेरी धरम पत्नी श्रीमती सुमति के नाम कर गए। बाबू साहब को मेरा मिष्ठान भंडार का व्यापार करना पसंद नहीं था। में बचपन में मिठाई से बहुत प्रेम करता था। मेरी मा स्वर्गीय रखी मिश्रा का सपना था कि उनकी मिठाई अगर शाहर में सब से बड़ा प्रसिद्ध मिष्ठान भंडार हो। पिता की के होते हुए कभी भी मेरी मां रेडियो नहीं चलती थी। पता नहीं बाबू साहेब को क्यूं इतना गुस्सा आता था रेडियो पर । साल दो साल बात नहीं करते थे अगर गलती से भी रेडियो की आवाज़ सुनाई दे ।

सपने हर कोई देखता है अखबार बाबू पर उनको पूरा करने में बहुत पापड़ बेलेने होंगे। उन सपनों को उड़ान भरने कलिए हिम्मत करना पड़ता हैं। बस पिता जी के मृत्यु के बाद घर का आमदानी और गुजरा करना की ज़िम्मेदारी मुझ पर आगई। सुमति जी बाबू साहेब की बहुत क़रीब थी। उस घर की बहू नहीं इस घर को एक बेटी बान कर मुझे और मेरे परिवार को कहानियां सुना कर समेत दिया था। "बड़ा ही घाम बरा माहौल है श्रीमान आपका । " कहकर अखबार बाबू वह से अपनी साइकिल की घंटी बजा कर निकाल पड़े। सुधीर जी मुस्कान को आवाज़ देकर नीचे बुलेट है। मुस्कान बड़ी ही शांत लड़की है। अपने पापा से उतना लगाव नहीं था जितना प्रेम वह सुमति से कर्थी थी।

मुस्कान को आधुनिक परंपरा में जीना पसंद नहीं था । कशिश बड़ा ही नतकट लड़का था। नारायण मूर्ति जी का बड़ा बेटा। उनका बेटी निर्मला मुस्कान की सहेली है। दोनों सखियां कभी जुड़ा नही होना चाहती थी। पर किस्मत का खेल भी किसी के समझ नहीं आता ।अगर समझ भी आगया तो बहुत देर हो चुकी होगी। नारायण जी अपनी बेटी का विवाह निमंत्रण लेके आए। सुनिधि जी के आज्ञा के बिना घर में एक सूखा पता भी नहीं गिरता । इसलिए उनको महोले के लोग लती वाली सुमति कहते थे। घर के चौकट पर नारायण जी दस्तक दिए ज़ोर से पुकारते है। " श्रीमान सुधीर बाबू , सुमति जी कोई है इस घर में?" पुकार क्यों रहे हो बैरिस्टर नारायण साहब आरेही ही । सुमति जी उनका स्वागत में एक लड्डू त्यार रखती है। "आप नारायण जी । पधारो हमारे इस छोटे से घर में।" नारायण जी हालचाल बताते हैं और पूछते है कि कहा है हमारे नंड लाल ? कहा चुप के बैठे हैं श्रीमान सुधीर साहब ज़रा बुलाए उनको। मेरे जिग्री यार को देखे बिना पूरे बीस साल गुजारे है।

सुमति निवास की एक खासियत है। ये घर अपना पराया नहीं होता । कोई पड़ोसी या बाहर वाला नहीं होता। सब एक है और अपने पं की धागे में मोती जैसे बंधे हुए होते हैं। ज़िन्दगी कभी कभी कटे पतंग सी लगती है जब अपनों को छोड़ के कहीं और एक नई शुरुवात करनी पड़ती है। बदलते वक़्त के साथ इंसान भी अपनी ज़िन्दगी जीने का तरीका भी बदल लेता है।

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